:ارمغان کا تازہ شمارہ
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۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔ اخلاق کے موتی برسائے (اداریہ) |
وصی سلیمان ندوی |
۳ |
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ولادت باسعادت |
مولانا عبد الماجد دریابادی ؒ |
۵ |
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دعوت دین ہمارا منصبی فریضہ |
مولانا محمد کلیم صدیقی |
۷ |
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انسانیت کا منشور آزادی |
ڈاکٹر نثار احمد فاروقی |
۱۲ |
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نسیم ہدایت کے جھونکے (انٹر ویو) |
سدرہ ذات الفیضین (مثنیٰ) |
۱۶ |
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اسوہ نبوی اور ہمارا طرز عمل |
مولانا مطیع الرحمن عوف ندوی |
۲۳ |
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نعت پاک |
رئیس الشاکری ندوی |
۲۵ |
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ہندوستان میں نظام قضا کے قیام کا مسئلہ |
حضرت مولانا قاری محمد طیب صاحب |
۲۶ |
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ہجرت کے دو سبق |
مولانا محمد حذیفہ وستانوی |
۲۹ |
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خصائص خاتم النبیین ﷺ |
مولانا جاوید اشرف مدنی |
۳۲ |
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خبروں کی دنیا |
محمد ادریس قریشی ولی اللہی |
۳۵ |
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فقہی مسائل |
مفتی محمد عاشق صدیقی ندوی |
۳۶ |
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کتاب نما |
مولانا محمد حنیف قاسمی |
۳۸ |
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گرامی نامے |
ادارہ |
۳۹ |
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آخری صفحہ |
مولانا محمد کلیم صدیقی |
۴۰ |
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آپ کی امانت آپ کی سیوا میں
حرفِ چند ایک نادان بچہ سامنے سے ننگے پیر آرہا ہو اور اس کا ننھا سا پاؤں سیدھے آگ پر پڑنے جارہا ہو تو آپ کیا کریں گے؟ آپ فوراً اس بچے کو گود میں اٹھا لیں گے اور اسے آگ سے بچاکر بے انتہا خوشی محسوس کرےں گے۔ اسی طرح اگر کوئی انسان آگ میں جھلس جائے یا جل جائے تو آپ تڑپ جاتے ہیں اور اس کے لےے آپ کے دل میں ہم دردی پیدا ہوجاتی ہے۔ کیا آپ نے کبھی سوچا: آخر ایسا کیوں ہے؟ اس لےے کہ تمام انسان ایک ہی ماں باپ۔ آدم و حوا کی اولاد ہیں اور ہر انسان کے سینے میں ایک دھڑکتا ہوا دل ہے، جس میں محبت ہے، ہم دردی ہے، غم گساری ہے۔ وہ دوسروں کے دکھ درد پر تڑپ اٹھتا ہے اور ان کی مدد کرکے خوش ہوتا ہے، اس لےے سچا انسان وہی ہے، جس کے سینے میں پوری انسانیت کے لےے محبت کا جذبہ ہو، جس کا ہر کام انسان کی خدمت کے لےے ہو اور جوکسی کو بھی دکھ درد میں دیکھ کر بے چین ہوجائے اور اس کی مدد اس کی زندگی کا لازمی تقاضا بن جائے۔ |
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दो शब्द यदि आग की एक छोटी सी चिंगारी आपके सामने पड़ी हो और एक अबोध बच्चा सामने से नंगे पाँव आ रहा हो और उसका नन्हा सा पाँव सीधे आग पर पड़ने जा रहा हो तो आप क्या करेंगे? आप तुरन्त उस बच्चे को गोद में उठा लेंगे और आग से दूर खड़ा करके आप अपार प्रसन्नता का अनुभव करेंगें। इसी प्रकार यदि कोई मनुष्य आग में झुलस जाये या जल जाये तो आप तड़प जाते हैं और उसके प्रति आपके दिल में सहानुभूति पैदा हो जाती है। क्या आपने कभी सोचा अखिर ऐसा क्यों है? इसलिए कि समस्त मानव समाज केवल एक मातृ-पिता की संतान है और हर एक के सीने में एक धड़कता हुआ दिल है जिसमें प्रेम है हमदर्दी है और हानुभूति है वह एक दूसरे के दुःख सुख मे तड़पता है और एक दूसरे की मदद करके प्रसन्न होता है। इसलिए सच्चा इन्सान और मानव वही है जिसके सीने में पूरी मानवता के लिए प्रेम उबलता हो, जिसका हर कार्य मानवता की सेवा के लिए हो और जो हर एक को दुःख दर्द मे देखकर तड़प जाए और उसकी मदद उसके जीवन का अटूट अंग बन जाए। इस संसार में मनुष्य का यह जीवन अस्थाई है, और मरने के बाद उसे एक और जीवन मिलेगा जो स्थाई होगा। अपने सच्चे मालिक की उपासना, और केवल उसी की माने बिना मरने के बाद के जीवन में स्वर्ग प्राप्त नहीं हो सकता और सदा के लिए नरक का ईंधन बनना पड़ेगा। |
In the Name of God, Most Gracious, Most Merciful PREFACE How would you react if you were to see a child coming barefoot and about to step onto a tiny, burning ember smoldering on the ground? Obviously, you would, at once, rush to the child and sweep him off into your arms. And, what a huge sense of relief and satisfaction would you experience by thus drawing him away from the flames! In much the same way, if a man were about to be burnt and torched up in a fire, you would be terribly upset.. Your heart, your whole being, would reach out to him in agony and compassion. Ever thought why this happens? |

